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URL क्या है? इसके प्रकार, भाग, इतिहास और URL Full Form in Hindi

URL क्या है – URL से आप क्या समझते हैं। आज का युग कंप्यूटर युग है। जिसमें सभी काम कंप्यूटर से हो जाता है। प्रत्येक कार्य के लिए एक Website बना हुआ है। जिसके जरिए सभी काम को कंप्यूटर से किया जाता है। किसी Website तक पहुंचने के लिए उसके पते (Address) की आवश्यकता होती है। तभी हम उस Website तक पहुंच सकते हैं। URL वेब पर पते का कार्य करता है। जिसका उपयोग आज के समय बहुत ज्यादा हो रहा है। जैसे; अगर आपका Result जारी हुआ है और आप अपने दोस्त से पूछते हो कि Results कहाँ या किस Website पर Check हो रहा है। तब यदि आपके Friend को पता होगा। तब वह एक URL दे देगा।

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आप पूछोगे क्यों, URL क्यों देगा? क्योंकि Results कहाँ Check हो रहा है। यह बताने से बेहतर और आसान है कि वह एक पता (Address) दे दे। जिससे आप Result Check करने वाली Website पर पहुंच सको। इतना बताने मात्र से आप समझ गए होंगे कि URL क्या है? जी हाँ, आप सही सोच रहे हैं, URL किसी वेब का Address होता है। जिसके जरिए कोई भी उसके Website या Webpage तक पहुंच सकता है। आज सभी लोग अपने स्मार्टफोन में लगे रहते हैं। क्योंकि आज इंटरनेट इतना विकसित हो गया है कि आज कोई भी इससे अपना TimePass या मनोरंजन कर सकता है। हालांकि इससे पढ़ाई भी कर सकते हैं। कुछ नया Skills सीख सकते हैं।

इंटरनेट का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। यह आप पर निर्भर करता है। क्योंकि यहाँ अच्छे और बूरे दोनो तरह के सामग्री है। अच्छे सामग्री का उपयोग कर आप हर दिन कुछ नया सीख सकते हैं। जबकि बूरे सामग्री का उपयोग कर खुद को तबाह कर सकते हैं। खैर! हम बात कर रहे थे URL की। तो क्या आपको पता है कि URL क्या है। चलिए कोई बात नहीं, इस लेख को पढ़ने के बाद आपको URL की पूरी जानकारी हो जाएगा। तो देर किस बात चलिए सबसे जानते हैं कि URL क्या है? उसके बाद URL का Full Form जानेंगे।

URL क्या है? (What is URL in Hindi)

जिस तरह किसी मकान का पता होता है। जिस पते के सहारे कोई भी उस मकान तक पहुंच सकता है। ठीक उसी तरह Internet पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री का एक पता होता है। उस पते को ही URL कहा जाता है। अर्थात Internet पर उपलब्ध हरेक संसाधन के विशिष्ट पते को URL नाम दिया गया है। इसे Tim Burners-Lee और Internet Engineering Task Force (IETF) द्वारा सन् 1994 में विकसित किया गया था। Tim Burners-Lee वही व्यक्ति हैं। जिन्होंने HTTP, WWW और HTML जैसे कई तकनीक का आविष्कार कर Internet को विकसित करने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था।

चूँकि Internet दुनिया का सबसे बड़ा Computer Network है। जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सूचना और संसाधन जैसे; Files, Documents, Images, Texts, Videos, Animations, Graphics इत्यादि उपलब्ध है। Internet पर इस तरह के सूचना और संसाधन असीमित है। इसलिए प्रत्येक संसाधन की पहचान करने के लिए एक Web Address तैयार किया गया। जिसे URL कहते हैं। URL को Web Address भी कहते हैं। इस तरह World Wide Web (WWW) पर उपलब्ध प्रत्येक संसाधन की अपनी एक पहचान हो गई। जिसकी सहायता से उसे पहचानने के अलावा Internet पर ढूंढा भी जा सकता है।

सरल शब्दों में कहें तो अगर आपके पास Internet पर उपलब्ध किसी संसाधन का URL मालूम है। तब आपको ढूंढने की भी आवश्यकता नहीं है। मात्र उस URL की सहायता से उसके संसाधन को Access कर सकते हैं। इसलिए URL जरुरी होता है। हर उस व्यक्ति के लिए जो Internet की कुशलता प्राप्त करना चाहता है। URL की सहायता से संसाधन को Access करने के लिए Web Browser का इस्तेमाल किया जाता है। Web Browser सभी के Mobile और Computers में होती है। क्योंकि इसी Software से हम सब Internet की हरेक संसाधन को Access करते हैं। Access कैसे करते हैं। इसकी जानकारी भी हमने लेख के अंत में बताया है।

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URL का Full Form (URL Full Form in Hindi)

URL का Full Form – क्या आप जानते हैं कि URL का विस्तारित रूप यानी Full Form क्या होता है। URL का Full Form Uniform Resource Locator होता है। इसके Full Form से साफ पता चलता है कि यह तरह का Locator है। जो Resources को Locate करती है। आपके जानकारी के लिए बता दें कि Uniform Resource Locator को हिंदी में सम स्रोत निर्धारक कहते हैं।

  • U – Uniform
  • R – Resource
  • L – Locator

चलिए URL के Parts के बारे में जानते हैं। इसके भाग को जानने के बाद आपको URL की महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानकारी होगी।

URL के भाग (Parts of URL in Hindi)

जिस तरह किसी मकान या स्थान तक पहुंचने के लिए उसके पते को आवश्यकता होती है। ठीक उसी तरह आपको Internet पर उपलब्ध किसी संसाधन जैसे; फोटो, वीडियो आदि तक पहुंचने के लिए आपको उसके URL की आवश्यकता होगी। URL से उस संसाधन को Access कर उसे देख सकते हैं। एक URL बहुत सारे Parts से मिलकर बना होता है। प्रत्येक Parts का कुछ न कुछ काम होता है। चूँकि Internet पर उपलब्ध प्रत्येक संसाधन किसी न किसी Website या Webpage पर उपलब्ध रहता है। इसलिए URL से हम यह भी पता कर सकते हैं कि संसाधन किस Website अथवा Webpage पर मौजूद है। इसके लिए आपको URL के Parts के बारे में जानना होगा। प्रत्येक URL में मुख्य रूप से निम्नलिखित Parts होते हैं।

  • Protocol
  • Separator
  • Subdomain
  • Domain Name
  • Directory
  • Resource

URL को एक खास संरचना के अनुरूप लिखा जाता है। जिसे URL Syntax कहा जाता है। अर्थात URL Syntax ही URL Structure को Defined करता है। यानी URL कैसे लिखना है यह बताता है। चलिए URL Syntax के प्रत्येक Parts को विस्तार से जानते हैं।

1. Protocol

URL Protocol को URL Scheme भी कहते हैं। इसका कार्य Browser और Server के बीच होता है। जो Browser को यह बताता है कि Server पर उपलब्ध संसाधन को कैसे प्राप्त करना है। आज के समय में HTTPS सबसे लोकप्रिय Protocol है। जो Encryption का उपयोग कर सूचना या संसाधन को सुरक्षित प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है। Encryption का मतलब है कि सूचना या संसाधन को एक Encode कर देना और उसके बाद ट्रांसफर करना। जिससे वास्तविक संसाधन सुरक्षित रहता है।

क्योंकि Encrypted संसाधन को Decode करना आसान नहीं होता है। इस तरह Browser और Server के बीच संसाधन (Data) Transfer करते वक्त बीच में चोरी होने का डर नहीं होता है। चोरी होने पर भी ऐसे संसाधन का दुरुपयोग संभव नहीं होता है। क्योंकि इसका उपयोग करने के लिए सबसे पहले उसे Decode करना होगा। जो कि आसान नहीं है। HTTPS से पहले HTTP का उपयोग होता था। अभी भी बहुत सारे Site HTTP का उपयोग करते हैं। जो कि असुरक्षित है। HTTP का पूरा नाम Hypertext Transfer Protocol होता है।

यह Encryption का उपयोग नहीं करता है। यह संसाधन को वास्तविक रूप में ट्रांसफर करता है। लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए HTTPS को लाया गया। जो कि HTTP का Secure Version है। प्रत्येक URL में HTTP या HTTPS शुरुआत में ही होता है। जिसके बाद :// होता है। इसके अलावा भी कई Standard Protocol हैं। जैसे; ftp, mailto, telnet इत्यादि। इन सभी का उपयोग URL में Protocol के रुप में होता है। एक URL में कोई एक Protocol ही होते हैं। जो संसाधन का आदान-प्रदान करते हैं।

2. Separator

Separator एक तरह का Special Symbol या Sign होता है। जो URL के सभी भाग को अलग करने या Separate रखने का कार्य करता है। उदाहरण के HTTP या HTTPS के बाद जो कॉलन और स्लैश (://) होता है। चूँकि यह भी URL का एक हिस्सा है और इसे Separator कहा जाता है। प्रत्येक URL में कॉलन और डबल स्लैश (://) Separator सिर्फ Protocol के बाद होता है। इसके अलावा URL के अन्य भाग को अलग करने के लिए सिर्फ स्लैश (/) का उपयोग होता है।

3. Subdomain

चूँकि एक URL में Protocol के बाद और Domain Name के पहले वाले Name को Subdomain कहते हैं। असल में यह Domain Name का ही हिस्सा होता है। जिसे Domain Name से अलग सिर्फ एक डॉट (.) द्वारा किया जाता है। आमतौर पर एक URL – https://www.gyanveda.in की तरह होता है। इसमें WWW को भी Subdomain माना जाता है। जो कि URL में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला Subdomain है। फिलहाल इसे रखना कोई जरूरी नहीं है। आप जिस पेज पर यह लेख पढ़ रहे हैं। उसके URL को देख सकते हैं। उसमें WWW नहीं है। अब अगर आप इस पेज के URL में WWW लगा कर Open करेंगे। तब भी यही पेज Open होगा। इसे हटाने या लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

लेकिन इसके अलावा भी हम Subdomain अपनी मर्जी से बना सकते हैं। जो कुछ इस तरह दिखेगा – https://eng.gyanveda.in इसमें आप देख सकते हैं। जो eng है। वह Subdomain है और इसमें WWW नहीं है। आप रख भी सकते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ने वाला जैसे; https://www.eng.gyanveda.in eng के स्थान पर कुछ भी रख सकते हैं। इसे आप Website के एक अलग Branch के रुप में समझ सकते हैं।

4. Domain Name

Domain Name के बारे में तो आपको पता होगा। ज्यादातर Website का Domain Name उसके Website का नाम ही होता है। उदाहरण के लिए आप इस Website को देख सकते हैं। इस Website का नाम Gyanveda है और Domain Name https://gyanveda.in है। इससे आप समझ गए होंगे कि एक URL में Domain Name क्या होता है और कहाँ होता है। इस तरह Domain से आप Website की पहचान भी कर सकते हैं। जिसकी सहायता से आप Website तक पहुंच सकते हैं और उसे देख सकते हैं।

इस URL में .in वाला भाग Domain Suffix या Top Level Domain कहलाता है। इसे संक्षेप में TLD कहते हैं। Domain का Suffix भाग Domain Extension भी कहलाता है। Domain Extension वेबसाइट की Category या प्रकार को दर्शाता है। उदाहरण के लिए आपने बहुत सारे Website के .com TLD देखा होगा। जो बताता है कि Website Commercial है। इसी तरह .org का Organisation, .net का network organisation और इसी तरह हजारो Top Level Domain (TLD) है। जैसे; .edu, .gov, .mil, .in, .us, .ca इत्यादि।

5. Directory

Directory किसी Website में एक ऐसा जगह है। जो किसी विशेष कार्य के लिए समर्पित होता है। Directory से Website को कई हिस्सो में बांट सकते हैं। एक Domain Name के साथ कई Directories बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए इस Website पर सिर्फ Article Publish किए जाते हैं। अब अगर मैं Videos भी Publish करना चाहता हूँ। तब Video के लिए एक अलग Directory बना सकते हैं। जहाँ सिर्फ Videos होंगे। एक URL में Directory Top Level Domain (TLD) के बाद होता है।

जिसे Slash (/) के साथ अलग किया जाता है। जैसे; https://gyanveda.in/videos इसमें Video एक Directory है। Website में Directory का Subdirectory भी हो सकता है। इसे आप आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हो कि हम अपने Phone के File Manager में Videos एक जगह रखने के लिए Videos नाम से एक Folder बनाते हैं। वहीं सभी Videos को रखते हैं। उस Folder में भी एक से अधिक और Folder बना सकते हैं। जिसे Sub Folder कह सकते हैं। इसी तरह Website में भी होता है। बस उसे Directory और Subdirectory कहते हैं।

6. Resource

एक URL में Resource वास्तविक Resource यानी संसाधन का नाम होता है। जिसे की Web Server पर रखा गया होता है। जिसे आप URL की सहायता से Access करना चाहते हैं। जिसमें फोटो, विडियो, गाने और डॉक्युमेंट इत्यादि कई तरह के फाइल्स होते हैं। यह Webpage भी हो सकता है। File नाम के अंत में File Extension होता है। जिससे उस File के प्रकार को पहचान सकते हैं। कुछ अधिक उपयोगी File का Extension .html, .htm, .php, .asp, .cgi, .xml, .jpg और .png इत्यादि है।

URL के प्रकार (Types of URL in Hindi)

URL को मुख्य रूप से दो भागो में बांट सकते हैं।

1. Absolute URL

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि यह एक पूर्ण URL हैं। Absolute URL में Internet के किसी संसाधन तक पहुंचने के लिए आवश्यक सभी जानकारी होती है। जिसमें Protocol, Host/Domain Name, Directory और File Name इत्यादि शामिल होता है। ऐसे URL को Absolute URL कहते हैं। Absolute URL के द्वारा Web Browser का उपयोग कर संसाधन को Access कर सकते हैं। लेकिन अगर इसमें से कोई अक्षर या कुछ भी हटा देने से Web Browser उचित संसाधन तक नहीं पहुंचाएगा। जैसे; अगर Protocol या Domain Name में गड़बड़ है। तब Web Browser सही Web Server से Connection नहीं बना सकता है। वहीं Directory या File Name में गड़बड़ी होने पर Web Browser Server से Connection बना सकता है। लेकिन उससे सही संसाधन Load नहीं कर पाएगा।

Absolute URL का उदाहरण:-

https://example.com/service/index.html

2. Relative URL

एक Relative URL में आमतौर पर सिर्फ Directory और File Name होता है। या फिर केवल File Name भी हो सकता है। ऐसे Relative URL का उपयोग हम तब करते हैं। जब हम ऐसे संसाधन को Access करना चाहते हैं। जो उसी Directory में हो या फिर मूल संसाधन के समान Web Server में उपलब्ध हो। ऐसी स्थिति में Web Browser को Protocol या Server Address/Domain Name की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रकार के URL का उपयोग ज्यादातर LocalHost पर होता है।

Relative URL का उदाहरण:-

  • service/index.html
  • index.html

URL कैसे काम करता है? (How URL Work in Hindi)

Internet पर उपलब्ध सभी Website का अपना एक IP Address होता है। जिसकी सहायता से हम उसे Access कर पाते हैं। असल में वह IP Address उस Web Server की होती है। जिस पर Website का डेटा संग्रहित होता है। शुरुआत में Web Browser के द्वारा Website को उसके IP Address से Access करते थे। जब Web Browser में IP डालकर Search किया जाता था। तब Web Browser Server से Connection बनाकर उस पर उपलब्ध संसाधन या डेटा को Load कर के दिखा देता था। लेकिन समय के साथ Website की संख्या बढ़ने लगी।

जिससे सभी Websites के IP Address याद रखना मुश्किल हो रहा था। इस समस्या का निवारण Domain Name के द्वारा किया गया। आज भी Website का मूल पता IP Address ही है। वास्तव में Domain Name IP Address को ही Represent करता है। जब Web Browser में Domain Search करते हैं। तब DNS की मदद उस Domain को IP Address में बदल दिया जाता है और उसके बाद Web Browser Server से Connection बना लेता है।

इस तरह अब User को IP याद करने की आवश्यकता नहीं है। फिर बात आती है URL की। Domain Name की सहायता से हम Server से Connection तो बना सकते हैं। लेकिन Server पर उपलब्ध किसी एक संसाधन को Access करने के लिए URL को बनाया गया है। इसमें बहुत सारे Parts होते हैं और सभी का अपना महत्वपूर्ण काम होता है। जैसे; सबसे पहले Protocol होते हैं। यह संसाधन को आदान-प्रदान करने का काम करता है। उसके बाद Domain Name यह Server की पहचान कराता है। यानी उससे Connection बनाने में Address का कार्य करता है। उसके बाद Directories और File Name इत्यादि होता है। यह सभी Server से Connection बनाने के बाद Server पर संसाधन को ढूंढने या पहचाने में मदद करता है। कुछ इसी तरह URL काम करता है। तब जाकर संसाधन Load होता है।

URL का इतिहास (History of URL in Hindi)

Uniform Resource Locator (URL) को दुनिया के सामने सबसे पहले Tim Burners-Lee और उनके टीम के द्वारा लाया गया था। इन्हें ही URL का आविष्कारक भी माना जाता है। क्योंकि इन्होंने ही सबसे पहले URL को वेब का Unique Locational Address का Idea सबके सामने लाया था। यह Idea Tim Burners-Lee ने WWW को विकसित करने के बाद लाया था। जिससे ऑनलाइन संसाधन को आसानी से खोजा जा सके। HTML को बनाने के बाद Tim Burners-Lee ने Standard Language का उपयोग कर के World Wide Web के साथ बहुत सारे Page बनाये। बाद में उन Pages को आपस में जोड़ दिया। कुछ इसी प्रकार URL का निर्माण हुआ है।

URL Shortener क्या है? (What is URL Shortener in Hindi)

ज्यादातर बड़े और Standard Website के URL बहुत ज्यादा लंबे होते हैं। जिसे Share करने मे कोई दिक्कत तो नहीं होती है। लेकिन दिखने गंदा जरुर लगता है। ऐसे स्थिति में ऐसे बहुत सारी कंपनीज हैं। जो अपनी Website के URL को Short या छोटा की हुई है। उदाहरण के लिए आप t.co Search कर सकते हैं। यह Twitter का है तथा link.d यह LinkedIn का है। इसी अनुसार इनके सभी URL Short हो जाते हैं। आप एक बार शेयर कर के भी Check कर के देख सकते हैं। URL को Short करने के लिए जिस Program अथवा Script का इस्तेमाल किया जाता है। उसे URL Shortener या URL Shortening कहते हैं।

आपको Internet पर ऐसे बहुत सारे URL Shortener Tool मिल जाएंगे। जिससे आप अपने भी Website के URL को Short में बना सकते हैं। उदाहरण के लिए bit.ly और goo.gl लोकप्रिय URL Shortener Site है। इससे अपने Website के URL को Short करना बिल्कुल FREE है। इसके लिए आपको कोई Charge नहीं देना होता है। बल्कि इन Website से तो आप खुद पैसे कमा सकते हो। मैंने पहले उसके बारे में बता दिया है कि URL Shortener Site से पैसे कैसे कमाया जाता है।

जानें: Url Shortener Site से पैसे कैसे कमाए?

URL कैसे पता करे? (Find URL in Hindi)

मैंने बताया कि Internet पर उपलब्ध एक-एक चीज का URL जरुर होता है। तब शायद कुछ लोग सोच रहे होंगे कि आखिर URL कैसे पता करते हैं। मुझे पता है कि बहुत सारे लोगों को यह पता होगा। कुछ लोग ऐसे भी जरूर होंगे। जिनके लिए यह जानना बहुत जरूरी है। आज के समय में लगभग सभी लोग Internet पर कई Webpage खोलते हैं। अब अगर आप उस Webpage का URL पता करना चाहते हैं। तब यह आपको Web Browser के URL Bar में दिख जाएगा। आज लगभग सभी Web Browser में URL Bar होता है। जैसे; अभी आप इस लेख को भी एक Webpage पर पढ़ रहे हैं।

अब अगर इस Webpage के URL को पता करना चाहते हैं। तब Browser (APP) के ऊपर के URL Bar में देख सकते हैं। अब आपको कोई भी Webpage पसंद आता है। तब आप उसके Webpage का URL को URL Bar से Copy कर के रख सकते हैं। ताकि बाद में उस URL की सहायता से कभी भी उस Webpage को खोल सके। लेकिन अगर आप Internet पर उपलब्ध किसी Image अथवा Video के URL पता करना चाहते हैं। तब आप उसे शेयर कर के Copy कर सकते हैं। इस तरह उस File का URL Copy हो जाएगा। अब अगर आपके पास URL है और आप उसे खोलना चाहते हैं। तब चलिए जानते हैं कि URL कैसे खोलते हैं।

URL कैसे खोलें? (Open URL in Hindi)

मैंने पहले ही बताया है कि Web Browser के द्वारा Internet के किसी भी संसाधन को Access कर सकते हैं। इसलिए अगर आपके पास किसी संसाधन का URL है। तब उसे Open करने के लिए आप Web Browser का इस्तेमाल कर सकते हैं। चाहे Facebook के Image का URL हो। या फिर YouTube के Video का URL हो। URL के द्वारा संसाधन को खोलने के लिए सबसे पहले किसी Web Browser को Open करे। उस Web Browser में ऊपर एक URL Bar होता है। उस URL Bar में URL डालकर Enter या Search कर दे। बस आपके Internet Speed के अनुसार कुछ पल में वह संसाधन खुल जाएगा। ध्यान रहे कि URL सही हो। वरना कुछ और खुल सकता है या फिर कुछ भी नहीं खुलेगा।

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URL संबंधित प्रश्न और उत्तर (FAQ)

1. URL किसे कहते हैं?

Internet पर उपलब्ध हरेक संसाधन का एक पता होता है। जिसे URL कहते हैं।

2. URL में क्या लिखा जाता है?

RFC 1738 के सिफारिश के अनुसार URL में Alphanumeric यानी Alphabets और Number के अलावा ! $-_+*() चिन्ह का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ भी इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले उसे Encode करना होगा। मुझे उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे कि URL में क्या लिख सकते हैं।

3. URL किस Bar में Show होता है?

सबसे पहली बात की Internet पर उपलब्ध प्रत्येक संसाधन का अपना URL होता है और जब भी आप Web Browser में उस संसाधन को Access करते या खोलते हैं। तब आप उसके URL को Browser के URL Bar में देख सकते हैं।

4. URL के तीन हिस्से कौन से होते है?

URL को निम्न तीन हिस्से में बांट सकते हैं।

  1. Protocol – Protocol के बारे में मैंने पहले ही बता दिया है। यह संसाधन को Server और Browser के बीच आदान-प्रदान करने का काम करता है। जैसे; HTTP, HTTPS, FTP आदि लोकप्रिय Protocols हैं।
  2. Domain/Host Name – Domain Name और Host Name के बारे में भी बताया था। इसे संक्षेप में बताऊं तो यह Server का Address होता है। इसकी वजह से Server का पहचान होता है और Browser उससे Connection बनाता है।
  3. Path – Path सामान्यतः File Name को दर्शाता है कि संसाधन Server पर कहाँ है। Domain Name के बाद Path होता है।

Conclusion – URL in Hindi

सामान्यतः URL को आप Web का Address यानी Web address समझ सकते हो। यह लेख आपको कैसा लगा। मुझे उम्मीद है कि इस लेख में आपको बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। इस लेख में हमने URL की पूरी जानकारी देने की कोशिश की है। जिसमें URL क्या है, URL के भाग, URL के प्रकार, URL कैसे काम करता है, URL को कैसे उपयोग करते हैं। सबकुछ बताया है। फिर भी अगर कुछ पूछना चाहते हैं। तो बेझिझक पूछ सकते हैं।

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